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बूढी आँखे

अंबर को तकती वे बूढी आँखे कहती है कथा निठुर नियति की  तब की, जब लाल पोतनी आसमान में, उषा चहक पोता करती . जब सावन में नन्ही बिटिया सी, बूंदे आँगन में नाचा करती . जब खेत पहन धानी पगड़ी, इठलाते थे इतराते थे . जब गन्ने के खेतो में छिप के, बाल मंडली घुस जाती थी . जब कूपों में पानी होता था , जब खाने को दाने होते थे , जब इन आखों के साथ अंग में, भी पुलक थिरका करती. जब सदा बसंती हृदयों में, प्रेम लहर उमड़ा करती. फिर आखें गीली हो जाती हैं; क्योंकि आधुनिक विकास की गर्मजोशी में बादलों के साथ ह्रदय भी सूख गए .

ऐसी होली खेल

न रंग चढ़े मोहे श्याम तुम्हारा ,न चढ़ पावै दुनिया का।   ऐसी होली खेल मेरे संग ,रंग चढ़े बस माटी का।   राष्ट्र-प्रेम की भंगिया पीकर , उसी प्रेम की फागें गाऊँ।   तीन रंग मुझ में घुल जावैं ,तीन रंग में मैं घुल जाऊँ।                                                                                                                -परमानंद 

पचमढ़ी

जब इम्तिहान सर होते है, जब पुलक कहीं खो जाती है। जब निशा चिरौरी करती है, जब उषा धमक दहलाती है। जिस-बीच परीक्षा पर-इच्छा से कृष्ण रात सी छाती है। पचमढ़ी उदित हो नागमणी सी, तू दस्तक दे जाती है। 

कलावंती (मराठी-कलावंतीण) दुर्ग

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यात्रा का मार्ग  १.  आई. आई. टी. मुंबई से पनवेल - लोकल ट्रैन द्वारा  २.  पनवेल से ठकुरवाड़ी - ऑटो रिक्शा या महाराष्ट्र स्टेट बस द्वारा  ३.  ऊपर तक ट्रेक  खाने की सुविधा  ऊपर होटल है। शाकाहारी एवं मांसाहारी दोनों प्रकार के भोजन की व्यवस्था है।  चित्रमाला 

भंडारदरा

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भंडारदरा महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित एक भ्रमण स्थल है। यात्रा का मार्ग एवं पड़ाव  आई. आई. टी. मुंबई से इगतपुरी या कसारा - महाराष्ट्र स्टेट बस या ट्रैन द्वारा  इगतपुरी या कसारा से घोटी - महाराष्ट्र स्टेट बस  घोटी से भंडारदरा - महाराष्ट्र स्टेट बस  नोट: ट्रांसपोर्ट बहुत काम है एवं सडकों की हालत भी संतोषजनक नही है।  चित्रमाला  विल्सन डैम एवं आर्थर लेक      स्पिल-वे  अमृतेश्वर मंदिर  कोंकण-कड़ा  रंधा प्रपात  रमणीय मार्ग