धरा धवल
धरा धवल धुली हुई जो धूल से बीमार थी. धूल से धमक उठी जो धूल की बयार थी. धूल धर्म धाम जिन्हे धूल ही बहार थी. धूल मे जो जा मिले वो धूल की पुकार थी. धूल के जो लाल थे वो धूल मे समा गये. धूल की ही आँधियों के बल हमें दिखा गये -परमानंद