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धरा धवल

धरा धवल धुली हुई जो धूल से बीमार थी. धूल से धमक उठी जो धूल की बयार थी. धूल धर्म धाम जिन्हे धूल ही बहार थी. धूल मे जो जा मिले वो धूल की पुकार थी. धूल के जो लाल थे वो धूल मे समा गये. धूल की ही आँधियों के बल हमें दिखा गये                                               -परमानंद 

पिता

ग़म का सागर भर के अंदर , दुःख की रेख छिपाते हैं। पलकों में बंध  नैन के आंसू , नैनो में अकुलाते हैं। माँ के नैना पल में झरते , अपने दुःख दिखलाते हैं। दुःख के भाव पिता का सुदृढ़ , बाँध तोड़ नहीं पाते हैं। ओले पड़ते जब राहों में , पिता छत्र बन जाते हैं। भव सागर में केवट बन के , सुत की नाव चलाते हैं। धर के रूप पिता का जग में , निराकार प्रभु आते हैं। मूरख 'परमा' तेरे हरि  भी , पितु को ईश बताते हैं                                                      -परमानन्द

भारत तेरी कहानी

कोई बेबस है,कोई बेघर है,कोई निवस्त्रे घूम रहे।  कहीं सिजियान पे नींद न आवै ,कहीं जमीनें चूम रहे।  कहीं बटर में ब्रेड न भावै,कहीं टुकड़ियन तरस रहे। कहीं दुबक रहे तन पाँवन में,सर पे ओले बरस रहे।  मधुर पवन के कहीं पे झोंके,कहीं पे झंझा पानी।  अरे ! विडम्बना से तर-तर है भारत तेरी कहानी।                                                          -परमानंद  

यह जग उलझन माहि

रे परमा ! यह जग उलझन माहि. पग-पग उलझन,हर डग उलझन. बिगड़े उलझन,बने तो उलझन. मोह बना तोरा बैरी मूरख,सुलझन ढूंढत नाहि. रे मूरख ! यह जग उलझन माहि.                               -परमानंद 

बुन्देलखंड जल संकट

धमका परो जेठ के मास, पानी टटम गाँव में नैयाँ। दस दस डब्बा साइकल टांगें चले जाट गैलारे। ओरन-ढोरन की न पूछो, फिर रए जीवन हारे।  धरनी रए गई है मो फार, पानी टटम गाँव में नैयाँ।  धमका परो जेठ के मास, पानी टटम गाँव में नैयाँ। हेंचत पानी परे फफोला, ढोवत गर्दन टूटी।  सपने भी पानी के आवै, ऐसी किस्मत फूटी।  'परमा' इते जिओ ना जाए, पानी टटम गांव में नैयाँ। धमका परो जेठ के मास, पानी टटम गाँव में नैयाँ।

पिंजरा धरो इतइ रए जाने

पिंजरा धरो इतइ रए जाने, पंछी उड़ जाने तत्काल। नाते घरी भरे के लाने, जे संग तोरे नई जाने; आँखी मिंचत नज़र नई आने, माया को सबरो जंजाल।  जो नित-नित होत पुरानो, अरे,मरम  न तेने जानो; पिंजरा काये तोए मिठानो, जी में है नइयां सर-स्वाद। भीतर बैठी जोन चिरैया, उको कछु भरोसो नइयां; 'परमा' मानत काये नइयां, भज ले बृजमोहन बृजलाल। 

Proposal for Lohagad Fort Trek

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हिंदी के लिए  यहां  क्लिक करें Brief Information Fort: Lohagad Region: Lonavala Height: 3389ft. Grade: Easy Location History  Lohagad has a long history with several dynasties occupying it at different periods of time: Satavahanas, Chalukyas, Rashtrakutas, Yadavas, Bahamanis, Nizams, Mughals and Marathas. Shivaji captured it in 1648 CE, but he was forced to surrender it to Mughals  in 1665 CE by the Treaty of Purandar. Shivaji recaptured the fort in 1670 CE and used it for keeping his treasury.  Tentative Schedule 06:14 AM - Board Indrayani Express at Thane 08:00 AM - At Lonavla Up to 10:00 AM - Breakfast and then  Bjaja Caves   10:00 AM - Ascending 12:00 PM - At the Fort 02:00 PM - Descending  03:20 PM - Lohagad Wadi 05:00 PM - At Malavli Station (have to catch 5:37 local train to lonavala) 06:00 PM - At Lonavala (Local may be 10 to 20 min. late) 07:25 PM - Board Indrayani Express for Mumbai ...