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जो यहाँ न समाते हैं

छंद : कवित्त  आते जो यहाँ हैं, नीचे तबके का दुख लिए, हिन्दू के विचार में, वो मोल नहीं पाते  हैं। भंजक बल फैलते हैं, एकता से खेलते हैं, उन्ही को वो खींचते, जो यहाँ न समाते हैं। खुद को जो हिन्दू कहें, निज में न माने इन्हे, ये जो रुख मोड़ दें तो, घोर गरियाते हैं।                                              -परमानंद  

पूत मेरा तारे संसार

कवित्त - भोर में नहाते, झट भोर उठ जाते जो वो, हुलस समाए मन, इसकूल जाते हैं। कूदते हैं फांदते हैं, गार सब रांदते हैं, कल की न जानते हैं, मौज वो उड़ाते हैं। श्रम में जो आंचते हैं, वर्णमाला बाँचते हैं, करम लिखे को पर, बाँच नहीं पाते हैं। चौपाई - सोलह साल उमरिया आई। लेकर तसला करो कमाई। करजा की हो गई भरमार। पूत मेरा तारे संसार।                                                                -परमानंद   हुलस = उल्लास / प्रसन्नता, इसकूल = स्कूल, गार रांदना = ऊधम करना, पूत = पुत्र 

नैनन की हुसियारी

आज लड़ी उनसे अखियाँ, सखियाँ बतियाँ कर जान निकारी।  गागर आज भई हलकी, छलकी उमगी भरजोर हुलारी।   बोल न बोल गए बलमा, बस नैनन तौल भई बनियारी।  लूट गओ हम खों बनिया, कर नैनन की हलकी हुसियारी।                                                                           -परमानंद  बनियारी = व्यापार, बनिया = व्यापारी 

सपरावत खीझ परी महतारी

पृष्ठभूमि:- आज भी वो दिन याद आ जाता है जब अम्मा बचपन में नहलाती थी। छंद:- मालती सवैया धूसर अंग धरे करिया, बनियान तने मल सी कर डारी। खेलत धूलि न भाँय करै, रत नाहिं घरै दिन-भोर-दुपारी। बाप दुलार बिगार  दिए, न उसार करे बनवै अधकारी। ऊ दिन खों अब याद करों, सपरावत खीझ परी महतारी।                                                                         -परमानंद  धूसर = धूल से सने, तने = तूने, भाँय = होश, रत = रहता, उसार = सेवा, खों = को, सपरावत = नहलाती, महतारी = माँ 

अपनी सजनी यह है परपाटी

पृष्ठभूमि:- रोड का काम प्रारम्भ होते ही मजदूर समुदाय में आशा जाग उठी। छंद:- मालती सवैया रामपुरा अब रोड डरे, चल री चल खोद भरें कछु माटी। काम करे कछु बात बने, अब भूखन जात न उम्मर काटी। राज लगे उनखों जिनकी, धन दौलत है जन की बरबादी। हाड़ गला नस खून बना, अपनी सजनी यह है परपाटी।                                                                        -परमानंद रामपुरा = एक गाँव का नाम, उनखों = उनको, हाड़ गला = हड्डियाँ गलाना 

लोहगढ़ किला भ्रमण प्रस्ताव

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Click  here  for English मित्रो, २० जून २०१५ को लोहगढ़ किला भ्रमण का निम्नलिखित प्रस्ताव रखता हूँ - संक्षिप्त जानकारी   किला  : लोहगढ़ क्षेत्र     : लोनावला ऊंचाई : 3389 फ़ीट ट्रेक     : सहज  अवस्थिति  लोहगढ़ का इतिहास  सातवाहन, चालुक्य, राष्ट्रकूट, यादव, मुग़ल और मराठों की गाथा समेटे हुए लोहगढ़ का एक लम्बा इतिहास है। इस किले को छत्रपति शिवाजी ने 1648 ई. में जीता लेकिन 1665ई. की पुरंदर की संधि में शिवाजी को यह किला मुग़लों को दाना पड़ा। 1670 में छत्रपति ने पुनः लोहगढ़ को जीता और इसके बाद इस किले का इस्तेमाल उन्होंने अपना खजाना रखने के लिए किया।  प्रस्तावित भ्रमण योजना  06:14 पूर्वान्ह - ठाणे से  इंद्रायणी एक्सप्रेस  पर सवार 08:00 पूर्वान्ह - लोनावला  10:00 पूर्वान्ह तक - स्वल्पाहार करके  भाजा कंदराओं  का भ्रमण  10:00 पूर्वान्ह - लोहगढ़ वाड़ी से किले का आरोहण प्रारम्भ  12:00 अपरान्ह - किले पर  02:00 अपरान्ह - अवरोहण प्...

आसुन आँस गई कतकी

विशेष :-  मालती सवैया नामक छंद का प्रयोग जिसमें सात भगण  ( S I I)  एवं अंत में दो गुरु वर्ण होते हैं। आसुन आँस गई कतकी, रब ने सजनी अब बादर फारे। जात किते अब खात किते, सनतान किते अब पालत बारे। सूद बढ़ै दिन रात अरी, जनु चाँद बढ़ै रजनी उजियारे। बीज बहाय लिए बरखा, सब नास कियो हरि पालनहारे। आसुन = इस वर्ष, आँस गई = खटक गई, कतकी = खरीफ की फसल, किते = कहाँ, सनतान = संतान, बारे = बालक